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 Indian Note Printing Process | 300 Note Printing | भारत में नोट कैसे और कहाँ छपता है ?

दोस्तो, आपके दिमाग में यह खयाल जरूर आता होगा कि भारत के पास नोट छापने की मशीन तो है। सरकार क्यों नहीं अनलिमिटेड पैसे छाप देती है जिससे कोई भी बेरोजगार न रहे और न ही कोई भीख मांग। लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकार के हाथ में सबकुछ होने के बावजूद ऐसा क्यों नहीं करती है? तो इन सभी सवालों का जवाब आपको हमारे इस content  में मिल जाएंगे।

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चलिए सबसे पहले आपको बता देते हैं कि सरकार अनलिमिटेड Printing Process पैसा क्यों नहीं छापती है। तो इस बात को समझने के लिए एक सिंपल सी बात आप यह समझिए कि किसी भी देश की गुड्स एंड सर्विस की वैल्यू उस कंट्री की प्रेजेंट करेंसी की वैल्यू से इक्वल होती है। अब आप यह मान लीजिए कि अगर सरकार अनलिमिटेड पैसे छाप देती है और सभी के पास बहुत सारा पैसा हो जाता है तो उसके बाद अगर मार्केट में जाएंगे तो मान लीजिए कि आपको किसी भी सामान को खरीदना है जिसकी कीमत पहले से 50 रूपए रही होगी। लेकिन अब कीमत बढ़कर कई गुना हो चुकी है। क्योंकि दुकानदार को जो पैसे मुनाफे के तौर पर बचते थे उससे कई गुना तो उसके पास पहले से ही मौजूद है तो दुकानदार मनमाने दामों पर वह प्रोडक्ट देगा और इसी तरह रॉ मटेरियल से लेकर तैयार माल तक सभी की कीमत आसमान छू लेगी और देश में महंगाई बढ़ जाएगी तो देश में महंगाई न बढ़ जाए। इसलिए सरकार अनलिमिटेड पैसा नहीं छापती।

इसलिए हम आपको बताते हैं कि हमारे देश में पैसा कैसे छपता है और पैसा Printing Process छापने की मशीन कहां पर है। सबसे पहले आप यह जान लें कि पैसे को छापने के लिए कुछ रूल्स और रेगुलेशन होते हैं, जिन्हें फॉलो करना पड़ता है। अपने मन से पैसे नहीं छापे जा सकते।

तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं कि सिक्को की Printing Process छपाई कैसे होती है और आपको बता दें कि यह रिस्पांसिबिलिटी इसकी रिजर्व बैंक के ऊपर है। कहने का मतलब है कि रिजर्व बैंक ही केवल कॉइन को छाप सकती है। 1 रुपये के नोट को छोड़कर सारे नोट रिजर्व बैंक ही छापती Printing Process है। क्योंकि 1 रुपये के नोट की जिम्मेदारी भारत सरकार को दी गई है तो यह दायित्व भारत सरकार निभाती है। जब रिजर्व बैंक और भारत सरकार की बात चल रही है तो आपको बता दें कि आरबीआई के पास बहुत ही पावर होती है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि आरबीआई के पास इतनी ताकत है कि वह 10,000 का नोट भी छाप सकती है।

लेकिन इसको छापने के लिए गवर्नमेंट का पूरा एक पैनल बैठता है। मीटिंग होती है तब कहीं जाकर इन नोटों को छापने की परमिशन मिलती है। और तब एक बात आपको बता दें कि जब भी नोट Printing Process छापे जाते हैं तो प्रधानमंत्री की मौजूदगी में इस बात का डिसीजन लिया जाता है कि कितने रुपये के कितने नोट छापे जाएंगे। तब कहीं जाकर नोटों के छापने का प्रोसीजर शुरू होता है। वहीं अगर हम बात करें नोट अपने मनमाने तरीके से Printing Process छापे जा सकते हैं या नहीं और यह ऑथरिटी हमारे हाथ में हो सकती है या नहीं तो ऐसा नहीं हो सकता। अगर ऐसा होगा तो हमारी इकोनॉमी बहुत डाउन हो जाएगी और साथ ही महंगाई आसमान छूने लगेगी। लोग मनमाने ढंग से पैसे का मिसयूज करने लगेंगे।

चलिए अब आपको बताते हैं कि हमारे देश में पैसा छापने की प्रिंटिंग मशीन कहां पर है। यह मशीनें एमपी के देवास, मैसूर, सालबोनी और नासिक में हैं।

कौन सी स्याही से कौन सा नोट छापा जाता है। तो दोस्तों देवास में जो नोट बनाने के इंक यूज की जाती है उससे Printing Process छपते हैं 10, 50, 500 के नोट। देवास में एक साल में 265 करोड़ रुपए के नोट छापे जाते हैं और वहीं सबसे बड़े नोट दो हज़ार की बात की जाए तो मैसूर में छापे जाते हैं। इन सब के अलावा हमारे देश में पेपर मिल है तो बैंक नोट प्रेस। और तो और चार टकसाल मील भी है जो कि हैदराबाद, मुंबई, नोएडा एंड कोलकाता में हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह नोट छपते कैसे और किस तरह से बनकर तैयार होते हैं।

तो आपको बता दें कि नोट Printing Process छपाई के लिए जिस पेपर का यूज किया जाता है, वह होशंगाबाद और फॉरेन कंट्रीज से आते हैं। इसके अलावा इंडियन नोट की बात की जाए तो इंडियन नोट बनाने के लिए तीन जगह का पेपर इस्तेमाल किया जाता है और वो जगह महाराष्ट्रा की करंसी नोट प्रेस। इसके अलावा ज्यादातर पेपर होशंगाबाद के पेपर मिल से आता है और जो कुछ पेपर रह जाता है वह बाहर के देशों से मंगवा लिया जाता है।

इसके अलावा हम आपको बता दें कि भारत में नोटों को कपास से भी बनाया जाता है क्योंकि यह सुरक्षा की दृष्टि से बिल्कुल सही होते हैं और इनकी क्वॉलिटी भी बहुत अच्छी होती है जिसके कारण ये काफी टाइम तक चलते हैं। इनको कॉपी कर पाना लोगों के लिए बहुत मुश्किल की बात होती है।

अब आते हैं अपने मेन मुद्दे पर यानी कि किस तरह से होती है नोटों की छपाई। सबसे पहले बाहर से आए हुए पेपर और होशंगाबाद के पेपर को साइमन नोट, साइमन मशीन में डाल दिया जाता है और इसके बाद दूसरी मशीन इन ताबूत में डाल दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है नोटों में यह देखने का काम कि इनमें से कोई नोट सही और कौन नोट खराब है। इनमें से जो खराब नोट होते हैं उन्हें हटा लिया जाता है और सही नोट पर नंबर प्रिंट कर दिए जाते हैं। उसके बाद फाइनल काम होता है एक एक नोट को चेक करना।

तो दोस्तों शायद आपको यह नहीं पता होगा कि दुनिया में केवल चार देश ऐसे हैं जहां पर नोट छापने की मॉर्डन मशीन है जैसे अमेरिका, फ्रांस और स्वीडन। यह तो ठीक है कि नोट छापने और बनाने के प्रोसीजर इस तरह होता है पर अब सवाल यह उठता है कि वहां से यह सारे नोट हमारे पास किस तरह पहुंचते हैं।

 दोस्तों, इन पैसों को। पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है रिजर्व बैंक की और हमारे देश में इंडियन रिजर्व बैंक के 18 ऑफिस है। अहमदाबाद, बेलापुर, चेन्नई, बैंगलूरु, चंडीगढ, भोपाल, गुवाहाटी, जयपुर, हैदराबाद, कोलकत्ता, कानपुर, जम्मू, मुंबई, नागपुर, तिरुवनंतपुरम, पटना, गणेश्वर, लखनऊ और भुवनेश्वर। सबसे पहले नोटों को इन ऑफिसेज में भेज दिया जाता है। उसके बाद ये सारे ऑफिसेज मिलकर इन्हें दूसरे दूसरे बैंकों को भेज देते हैं और इस तरह से पैसा आम तक पहुंचता है।

200, 500 और दो हज़ार के नोटों को छापने पर कितने रुपये का खर्च आता है। यह बात तो आप सभी जानते हैं कि आरबीआई 1 रुपये  के नोट को छोड़कर बाकी सभी नोटों को प्रिंट करती है। तो आरबीआई की रिपोर्ट की माने तो 200 के एक नोट को छापने में 2.93 रुपये  की लागत रहती है। 500 की प्रिंटिंग कॉस्ट की बात की जाये तो वह है 2.04 रुपये  वहीं अगर दो हज़ार के प्रिंटिंग कॉस्ट की बात की जाए तो यह है 3.54 रुपये

दोस्तो, हम सभी ने नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर को देखा है। आपके दिल में भी खयाल आता होगा कि आखिर महात्मा गांधी की फोटो नोट पर क्यों होती है। जानते हैं इसके बारे में। भारतीय करंसी पर पिछले कई सालों से हमने बहुत सारे चेंजेज देखे। लेकिन इन सब चेंजेस के बावजूद एक बात कॉमन है और वो है महात्मा गांधी की तस्वीर।

इस फोटो के चलते लोगों के दिलों में यह खयाल भी आता होगा कि पहली बार इस फोटो को किसने खींचा और सबसे पहले नोट पर उनकी फोटो कब प्रिंट की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के साथ आंदोलन करके देश को आजाद कराने के लिए बहुत लड़ाई लड़ी। इसके अलावा वे गरीबों की मदद के रूप में हमेशा खड़े रहे। इसलिए उन्हें राष्ट्रपिता का सम्मान दिया गया। यही सबसे बड़ा कारण है जो महात्मा गांधी को नोटों पर छापने के लिए मंजूरी दी गई।

 सबसे पहले यह तस्वीर छपी 1669 में। आपको बता दें कि सबसे पहले गांधी जी की तस्वीर पाँच और 10 के नोट पर छापी गई। अगर 1969 में महात्मा गांधी की तस्वीर सबसे पहले आई तो अब सवाल उठता है कि उनसे पहले नोट पर किसकी तस्वीर छपी थी। तो आइए आपको बताते हैं कि महात्मा गांधी के पहले नोट पर किसकी तस्वीर थी और उसकी शुरुआत कब हुई। उनसे पहले अशोक स्तंभ की तस्वीर नोट पर हुआ करती थी। आरबीआई ने नोटों को कुछ इस तरह से चेंज

किए तब उन्होंने फैसला किया कि नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर को प्रिंट करेंगे। महात्मा गांधी की फोटो प्रिंट कराने के बावजूद भी अशोक स्तंभ नोट से हटाया नहीं गया बल्कि उसकी जगह को शिफ्ट कर दिया गया। आज भी नोट में मौजूद है इन दोनों तस्वीरों से। पहले नोट पर किंग जॉर्ज की फोटो भी हुआ करती थी। वैसे आज भी बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि देश को आजाद कराने में भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस का भी बहुत बड़ा योगदान रहा तो ऐसे में नोटों पर उनकी तस्वीर का होना भी उतना ही जरूरी है। वेल, आपका इसके बारे में क्या खयाल है? हमें कॉमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं। मिलते हैं अपने अगले content  में। तब तक के लिए हमें दीजिए इजाजत।

What is the printing process of currency?

Printing Process एक उच्च स्तरीय और सुरक्षित प्रक्रिया है जो सेंट्रल बैंक और सरकारी मुद्रण प्राधिकरणों द्वारा Printing Process के बैंकनोट या कागजी Printing Process मुद्रा बनाने के लिए की जाती है । इस प्रक्रिया में मुद्रे की सुरक्षा और यथार्थता को सुनिश्चित करने के लिए कई जटिल कदम शामिल हैं । मुद्रे के निर्माण के विविध विवरणों को एक देश से दूसरे देश तक विभिन्न हो सकते हैं, लेकिन यहां एक सामान्य अवलोकन दिया गया है

डिज़ाइन और एनग्रेविंग कुशल कलाकार और एनग्रेवर मुद्रे के विविध डिज़ाइन तत्व बनाते हैं, जैसे मुख चित्र, प्रतीक और सुरक्षा सुविधाएं । इन डिज़ाइनों को आमतौर पर इस्पात प्लेट पर एनग्रेव किया जाता है, जो मुद्रण प्रक्रिया में उपयोग के लिए होती हैं ।

प्लेट निर्माण एनग्रेव्ड डिज़ाइन का उपयोग Printing Process मुद्रा नोटों को मुद्रण के लिए बनाने के लिए किया जाता है, जो आमतौर पर स्टील जैसी टिकाऊ सामग्री से बनी होती है । ये प्लेट्स Printing Process मुद्रा नोटों के मुद्रण के मास्टर टेम्प्लेट के रूप में काम करती हैं ।

कागज़ चयन Printing Process मुद्रा कागज़ विशेष रूप से तैयार किया जाता है और विशेष सुरक्षा सुविधाओं, जैसे वॉटरमार्क, सुरक्षा धागा और UV प्रतिक्रियात्मक रेशे जैसे विशेषता लक्षण होते हैं । आमतौर पर इसमें विशेष स्वरूप का कागज़ होता है, जो टिकाऊता बढ़ाने के लिए विशेष सूत्र और लिनन का मिश्रण होता है ।

इंटाग्लियो Printing Process मुद्रण सबसे महत्वपूर्ण और विशेष चरण है इंटाग्लियो मुद्रण । इस प्रक्रिया में एनग्रेव किए गए प्लेट का उपयोग कागज़ पर इंक लगाने के लिए किया जाता है जिससे उच्चीकृत, सुप्रतिगम मुद्रण छोड़ता है । इससे Printing Process मुद्रा को अपनी अनूठी बनावट और विविध विवरण और मार्किंग करने की संभावना होती है । इंटाग्लियो मुद्रण मुख चित्र और सीरियल नंबर जैसे महत्वपूर्ण डिज़ाइन तत्वों के लिए उपयोग होता है ।

ऑफसेट मुद्रण ऑफसेट मुद्रण का उपयोग अतिरिक्त डिज़ाइन तत्वों, जैसे पृष्ठभूमि रंग, पैटर्न और अन्य सुरक्षा सुविधाओं को जोड़ने के लिए किया जाता है । इस प्रक्रिया में इंटाग्लियो मुद्रण से कठिन रंग मिश्रण और विविध विवरण किए जाते हैं जिन्हें इंटाग्लियो मुद्रण के साथ प्राप्त करना कठिन होता है ।

लेटरप्रेस Printing Process मुद्रण कुछ सुरक्षा सुविधाओं, जैसे सीरियल नंबर के लिए, लेटरप्रेस मुद्रण का उपयोग किया जाता है । इस Printing Process प्रक्रिया में कागज़ पर ढकाने की छाप छोड़ती है ।

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